बीबीसी रेडियो 4 के टुडे प्रोगाम में बात करते हुए टॉम फ्लेचर ने ब्रिटेन, फ़्रांस और कनाडा की ओर से जारी किए गए संयुक्त बयान की सराहना की.
टॉम फ्लेचर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र दुनिया से ‘हमारा साथ देने’ की अपील कर रहा है ताकि इसराइल पर ग़ज़ा में ज़्यादा से ज़्यादा मानवीय मदद को जाने देने का दबाव बनाया जा सके.
फ्लेचर ने बताया कि सोमवार को ग़ज़ा में मदद के लिए पांच ट्रक पहुंच गए थे, लेकिन उन्होंने इस मदद को ‘समंदर में एक बूंद’ जैसा बताया.
इसराइल ने ग़ज़ा में 10 हफ़्ते की मानवीय मदद की नाकाबंदी के बाद सोमवार को वहां ‘ज़रूरी मात्रा में भोजन’ ले जाने की मंज़ूरी दी थी.
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने जवाब में फ़्रांस, ब्रिटेन और कनाडा पर पलटवार किया है.
उन्होंने कहा, “अगर हमास बंधकों को वापस कर दे, अपने हथियार डाल दे, अपने नेताओं के निर्वासन के लिए सहमत हो जाए और ग़ज़ा को हथियारमुक्त कर दे तो युद्ध समाप्त हो सकता है.”
नेतन्याहू ने कहा है कि ऐसी स्थिति में किसी भी देश से इससे कम कुछ भी स्वीकार करने की उम्मीद नहीं की जा सकती और इसराइल निश्चित तौर पर ऐसा नहीं करेगा.
नेतन्याहू, कथित युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के वारंट के तहत वांछित हैं लेकिन उन्होंने इसे “यहूदी विरोधी” बताकर खारिज़ कर दिया है.
नेतन्याहू पर ग़ज़ा की नाकाबंदी समाप्त करने के लिए भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव था, क्योंकि एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में वहां अकाल की स्थिति की चेतावनी दी गई थी.
यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के बीच लंदन शिखर सम्मेलन में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने ग़ज़ा में मानवीय संकट को “एक त्रासदी बताया, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून का व्यवस्थित रूप से उल्लंघन किया जा रहा है, और ग़ज़ा की पूरी आबादी को सैन्य बलों के अधीन किया जा रहा है.”